विवेकानन्दमय वर्ष 2013

विवेकानन्दमय वर्ष 2013

इस वर्ष स्वामी विवेकानन्दजी की 150वीं जयन्ती भारत सहित विश्वभर में बड़े धूमधाम से मनाई गई। विवेकानन्द केन्द्र के नेतृत्व में “स्वामी विवेकानन्द सार्ध शती समारोह समिति” की स्थापना की गई, जिसके अंतर्गत देश के सभी सामाजिक, सांस्कृतिक तथा गैर सरकारी संगठनों ने मिलकर अनेक भव्य कार्यक्रम किए। रामकृष्ण मठ ने भी देश-विदेश में अनेक संगोष्टियों, प्रदर्शनियों, सेवाकार्यों तथा साहित्य वितरण के माध्यम से स्वामी विवेकानन्द के विचारों को प्रसारित किया। सामूहिक सूर्यनमस्कार, भारत जागो युवा दौड़,शोभायात्रा जैसे अखिल भारतीय कार्यक्रमों को भव्य प्रतिसाद मिला। भारत के महामहिम राष्ट्रपति, माता अमृतानन्दमयी जैसे कई मान्यवर हस्तियों ने कार्यक्रमों में अपनी उपस्थिति दर्ज की।   

उत्तराखंड की त्रासदी, भारत के विकास मॉडल पर बड़ा प्रश्न चिन्ह

उत्तराखंड की त्रासदी, भारत के विकास मॉडल पर बड़ा प्रश्न चिन्ह

जून 2013 में उत्तराखंड में बादल फटने और मुसलाधार बारिश ने भयंकर प्राकृतिक आपदा का रूप ले लिया। यह देश में 2004 के सुनामी के बाद की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदा है। यद्यपि हिमाचल की पर्वतीय प्रदेश में सर्वत्र मुसलाधार वर्षा हुई, तथापि 95 प्रतिशत नुकसान अकेले उत्तराखंड को भुगतना पड़ा। उत्तराखंड सरकार के अनुसार 16 जुलाई, 2013 तक 5,700 से अधिक लोगों की मारे जाने की आशंका है। इनमें 934 स्थानीय लोग हैं। तबाही का मंजर ऐसा था कि पुल और सड़कें बुरी तरह उध्वस्त हो गए, इस कारण 1 लाख से अधिक यात्री तथा पर्यटक घाटी में फंसे रहे। घाटी में फंसे 1 लाख, 10 हजार से अधिक लोगों को वायु सेना, थल सेना और अर्ध सैनिक बलों ने सुरक्षित बाहर निकाला। उत्तराखंड के इस भयंकर त्रासदी को प्राकृतिक आपदा कहें या मनुष्य निर्मित आपदा इस विषय पर अभी भी बहस हो रही है।

देश में सर्वत्र नरेन्द्र मोदी की लहर

देश में सर्वत्र नरेन्द्र मोदी की लहर

वर्तमान में समूचे भारत में गुजरात के मुख्यमंत्री और भाजपा के प्रधानमंत्री पड़ के प्रत्याशी नरेन्द्र मोदी की लहर शुरू है। गुजरात में सुशासन का मॉडल स्थापित कर उन्होंने सम्पूर्ण विश्व को अपनी ओर आकर्षित किया। प्रखर नेतृत्व, बृहद विजन और बड़ा ध्येय रखनेवाले मोदी अपने जीवन में “नेशन फर्स्ट” का सन्देश देते हैं। मोदी ने भारत की अखंडता का सूत्रपात करनेवाले सरदार वल्लभभाई पटेल की 182 मीटर लोहे की प्रतिमा का निर्माण करने का निश्चय किया, जिसका पहला चरण सरदार पटेल की 63 पुण्यतिथि के अवसर पर 15 दिसंबर, 2013 को देशभर में 1100 स्थानों पर ‘रन फॉर यूनिटी’ नामक दौड़ के आयोजन के रूप में सम्पन्न हुआ।

रुपये की कीमत अबतक के सबसे निचले स्तर पर

रुपये की कीमत अबतक के सबसे निचले स्तर पर

भारतीय मुद्रा के लिये यह वर्ष बहुत खराब रहा| रुपये की कीमत डालर के मुकाबले अबतक सबसे नीचे स्तर पर मतलब 68.85 तक लुढक गयी थी| भारत की अर्थव्यवस्था में आयी गिरावट से भारत का रुपया गिरता ही गया| जून और अगस्त माह में भारत का रुपया 27 प्रतिशत गिरा| 2008 के आर्थिक मंदी से उबरने के लिए अमेरिका के फेडरल बैंक ने प्रतीमाह ८५ अरब डालर के बॉण्ड खरीदने जो कार्यक्रम जाहीर किया था, उसको कम करने का इरादा फेडरल बैंक ने प्रकट करते ही भारत में निवेश करने वाले विदेशी संस्थागत निवेशकों ने अपने हात खींचना शुरू किया और 28 अगस्त को रुपया डालर के मुकाबले 68.85 तक पहुँच गया| 

संन्यास के बाद सचिन को ‘भारतरत्न’

संन्यास के बाद सचिन को ‘भारतरत्न’

भारतीय क्रिकेट के लिए इस वर्ष की सबसे बड़ी घटना रही सचिन का क्रिकेट को अलविदा कहना। मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में अपना 200वां मैच खेलकर इस सार्वकालिक महानतम बल्लेबाज ने संन्यास ले लिया।भारतीय क्रिकेट के लिए यह एक युग का समापन था। खेल इतिहास ने एक महान खिलाड़ी के अभूतपूर्व विदाई का नजारा दर्ज किया। सचिन के प्रशंसक अभी सचिन की विदाई के गहरे सदमे से निकले भी नहीं थे, कि सचिन को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' दिए जाने की घोषणा ने उन्हें उल्लास से भर दिया।

दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला

दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला

इस वर्ष दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला का निधन हो गया। मंडेला 95 वर्ष के थे। फेंफड़े में संक्रमण की वजह से उन्हें तीन माह तक अस्पताल में रहना पड़ा था, जिसके बाद उन्हें उनके घर में ही गहन चिकित्सा सुविधा के दायरे में रखा गया था।नोबेल पीस प्राइज से सम्मानित मंडेला विश्व के श्रेष्ठ नेताओं में थे। वह 2004 में राजनीति से संन्यास लेने के बाद से सार्वजनिक स्थान पर बेहद कम नजर आते थे। उन्हें 2010 में दक्षिण अफ्रीका में आयोजित फुटबॉल विश्वकप में आखिरी बार सार्वजनिक स्थान पर देखा गया था। 

‘मंगल यान’ का सफल प्रक्षेपण

‘मंगल यान’ का सफल प्रक्षेपण

इसरो ने मंगल ग्रह की ओर जानेवाले यान का सफल प्रक्षेपण करके इस वर्ष के इतिहास में अपना नाम बना लिया। अमेरिका, रूस और यूरोपियन अंतरिक्ष संस्था के बाद भारत दुनिया का चौथा देश बन गया जो मंगल पर यान भेजने में सफल रहा। भारत के प्रक्षेपण की एक और विशेषता यह रही कि इस यान ने पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण का ही उपयोग करके गति प्राप्त की। 25 दिन तक पृथ्वी की प्रदक्षिणा करने के बाद इस यान ने पृथ्वी की कक्षा छोड़कर मंगल की ओर प्रस्थान किया है। इसरो के इस अभियान पर अन्यों की तुलना में बहुत कम खर्च होने के कारण भी दुनिया के देशों की नजरें इस अभियान पर टिकी हुई हैं।    

भारतीय मिसाईल कार्यक्रम के बुलंद इरादें

भारतीय मिसाईल कार्यक्रम के बुलंद इरादें

भारतीय मिसाईल विकास कार्यक्रम ने 2013 में आकाशव्यापि ऊंचाई छू ली है| सितम्बर माह में भारत ने अग्नि-5 नाभिकीय क्षमता मिसाईल का सफल प्रक्षेपण किया, जिसकी बीजिंग तथा बहुतेरे युरोप तक क्षमता है| इससे भारत नाभिकीय अस्त्र निर्माण की दिशा में और एक कदम आगे बढा है| अग्नि-5 यह भारत निर्मित अग्नि शृंखला, जिसका प्रारंभ 1960 में हुआ था, की एक अत्याधुनिक कड़ी है| 23 दिसम्बर को भारत ने नाभिकीय क्षमता के अग्नि-3 बैलेस्टिक मिसाईल का सफल परीक्षण किया, जिसकी आघात व्याप्ति (स्ट्राइक रेन्ज) 3 हजार किमी से अधिक है| अग्नि-3 मिसाईल, द्वि-चरण घन प्रणोदक (प्रोपेलन्ट) प्रणाली से शक्तिसंपन्न है| इसकी लंबाई 17 मीटर, व्यास 2 मीटर है तथा प्रस्थान भार (लॉन्च वेट) 50 टन का है| यह 1.5 टन का अस्त्रसंभार (वारहेड) वहन करने में सक्षम है| यह मिसाईल सेना में शामील किया गया है, जो हायब्रिड नेव्हीगेशन, गाईडन्स और कन्ट्रोल प्रणाली के साथ प्रगत ऑनबोर्ड संगणक से भी युक्त है|

जवानों का शिरच्छेदन : भारत सरकार ‘चर्चा’ पर अटकी हुई

जवानों का शिरच्छेदन : भारत सरकार ‘चर्चा’ पर अटकी हुई

8 जनवरी को पूंछ जिले में भारत-पाक सीमापर 13 राजपुताना रायफल्स के लान्स नायक हेमराज और सुधाकर सिंह के सिर, पाक सेना में घुसे आयएसआय के भाड़े के सैनिकों ने काट लेने के बाद, सवाल उभरा है कि, भारत कब उठ खड़ा होगा? पाकी सेना ने एक भारतीय जवान का सिर काटकर साथ ले गये और अभीतक उसे लौटाया नही है| दुर्भाग्य है कि, संभ्रमित अवस्था की धनी भारत सरकार अभी भी पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय संबंधों का राग अलाप रही है| 2013 में ऐसी सेंकडों घटनाएं हुयी जिसमें पाकिस्तान ने भारत पर हमले किये है तथा एलओसी को पार किया है| इसपर भारत सरकार की खामोशी आम भारतीयों के समझ के पार है| भारत ने पाकिस्तान को केवल आनुपातिक जबाब देने की बात कही है| अपने जवानों के अपमान का बदला लेने की दृढ इच्छा शक्ति का भारत सरकार में जो अभाव है, यह टीस आम भारतीय जनता में हमेशा रहेंगी|

भारतीय सिनेमा के 100 वर्ष पूर्ण

भारतीय सिनेमा के  100 वर्ष पूर्ण

भारतीय हिन्दी सिनेमा यानी बॉलीवुड अपने 100वर्ष पूरे कर चुका है। पता नहीं यह बॉलीवुड का शैशवकाल ही चल रहा है या फिर वो जवानी की दहलीज पर है। खैर, इन 100 वर्षों में भारतीय सिनेमा में कई ऐसे मौके आए जब बॉलीवुड के कारनामे से हमारा सीना चौड़ा हो गया। कई बार बॉलीवुड ने लज्जित भी खूब कराया। शुरुआती दौर में भारतीय सिनेमा लायक बना रहा। समाज को शिक्षित करता रहा। देश-दुनिया को भारतीय चिंतन, पंरपरा और इतिहास से परिचित कराता रहा। लेकिन, नई शताब्दी के पहले दशक की शुरुआत से ही इसके कदम बहकने लगे।

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2013 में हिंदुत्व विचारों का प्रबल प्रकटीकरण देखा गया: भैय्याजी जोशी

नासिक, दिसंबर 31: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह सुरेश (भैय्याजी) जोशी ने कहा कि वर्ष 2013 में समाज के प्रबुद्ध वर्ग में हिंदुत्व विचारों का प्रबल प्रकटीकरण और स्वीकार्यता देखी गयी।


undefinedन्यूजभारती से खास बातचीत में भैय्याजी जोशी ने कहा, “12 जनवरी 2013 को शुरु हुई विवेकानंद सार्धशती (विवेकानंद की 150वीं जन्म शताब्दी) को समाज के सारे वर्गों से अभुतपूर्व प्रतिसाद मिला। इस अवसर पर संगोष्ठियों, व्याख्यानों और इसी प्रकार के अन्य कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के अग्रणी लोगों के विचारों तक पहुंचने का प्रयास किया गया। इन प्रयासों को बहुत सकारात्मक प्रतिसाद मिला और परस्पर चर्चा की वजह से आज हम हिंदुत्व विचारों का व्यापक, उज्ज्वल व प्रबल प्रकटीकरण देख रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “हमें यह महसूस हुआ है कि समाज के अग्रणी लोगों ने पहले की तुलना में आज हिंदुत्व विचारों को बहुत ज्यादा स्वीकार्यता दी है।”

आम आदमी पार्टी : सारे राजनीतिक दलों के लिए एक इशारा

न्यूजभारती के विशेष संस्करण ‘एक नजर में 2013’ के लिए दिए गए विशेष साक्षात्कार में भैय्याजी जोशी ने वर्ष 2013 में घटी महत्वपूर्ण घटनाओं पर विस्तृत चर्चा की। जब उनसे दिल्ली चुनाव में अपने प्रदर्शन से सबको चौंकाने वाली आम आदमी पार्टी और राजनीति में नए बदलाव पर हो रही चर्चाओं के बारे में पूछा गया, तब उन्होंने कहा कि यह सारे राजनीतिक दलों के लिए एक इशारा है कि भविष्य में चुनाव के समय वे उम्मीदवार चुनने में सतर्क रहे।

केवल कानून से नहीं होगा : विधि एवं कानून मूल्यों के पर्याय नहीं है

समाज में महिलाओं के खिलाफ़ बढ़ते अत्याचारों पर उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अपराध रोगी और विकृत प्रवृतियों का परिणाम है।

उन्होंने कहा, “ हमारे समाज को परिवार, शैक्षिक संस्थानों और मीडिया के माध्यम से “संस्कार” या फ़िर मूल्यों को समाज में अन्तर्निविष्ट करने की आवश्यकता है। हमें यह बात सुनिश्चित करनी चाहिए कि समाज में योग्य मूल्य अन्तर्निविष्ट हों और यह केवल कानून पारित कर कर संभव नहीं है।”

उन्होंने कहा, “विधि एवं कानून मूल्यों के पर्याय नहीं है।”

जोशी ने हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय की धारा 377 के संदर्भ में दिए निर्णय को निष्प्रभावी करने की मांग पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत में समलैंगिकता को मंजूरी नहीं है और भारतीय संस्कृति में इसका कोई आधार नहीं है। इसलिये समलैंगिकता को कानूनी हैसियत दिलाने के लिये जो प्रयास चल रहे हैं वे कतई स्वीकार्य नहीं है।

भारत सरकार विश्वभर में रह रहे हिंदूओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे

बांग्लादेश और पाकिस्तान में हिंदूओं पर हो रहे अत्याचारों पर जोशी ने कहा कि भारत सरकार से हमेशा से ही यह अपील की गयी है कि वह विश्वभर में रह रहे हिंदूओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे। भारत सरकार को इस मुद्दे पर संबंधित राष्ट्र के समक्ष अपनी चिंता जाहिर करनी चाहिए।

कमजोर विदेश नीति के घातक फल

पाकिस्तान और चीन की ओर से सीमा पर हो रहे घुसपैठ और युद्धविराम उल्लंघन पर जोशी ने कहा कि भारत सरकार की कमजोर विदेश नीति के परिप्रेक्ष्य में ऐसी घटनाएं हमारे लिये नई नहीं है। अगर हमें भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना है तो इसके लिये हमारी विदेश नीति में सुधार आवश्यक है।

उन्होंने कहा, “आतंरिक और बाहरी सुरक्षा में किसी भी तरह की चूक घातक है। भारत को पाकिस्तान और चीन की तरफ़ से होने वाले वारदातों को गंभीरता से लेना चाहिए। भारत को किसी भी विदेशी दबाव के सामने झुकने की जरुरत नहीं है।”

भारतीय राजनयिक देवयानी खोब्रागडे के संदर्भ में भारत के कड़े रुख की जोशी ने सराहना की। उन्होंने कहा कि यह शायद भारत का मनोबल गिराने का प्रयास हो सकता है। भारत को आश्वस्त करना चाहिए कि कोई भी भविष्य में ऐसी हरकत करने की हिम्मत ना करे।

प्रशासनिक अधिकारीयों को आपत्ति व्यवस्थापन का उचित और पूरा प्रशिक्षण देना चाहिए

जोशी ने उत्तराखंड में आयी नैसर्गिक आपदा में मारे गये लोगों के लिये शोक व्यक्त किया।

उन्होंने कहा, “हमें यह बात सुनिश्चित करनी चाहिए कि भूवैज्ञानिक और भौगोलिक कारकों को ध्यान में रखकर निर्बाध ढंग से विकास योजनाओं का कार्यान्वयन हो।”

उन्होंने नैसर्गिक आपदा में राहत कार्य में जुटी भारतीय सेना की प्रशंसा की और साथ ही पीड़ितों के लिये पूरे देश से मदद भेजने वाले सामाजिक संगठनों की भी सराहना की। उन्होंने इस आपदा के दौरान सरकारी अमले के प्रतिसाद पर नाराजगी जताई और कहा कि सरकार को आपत्ति व्यवस्थापन का उचित और पूरा प्रशिक्षण देना चाहिए।